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श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड में बड़ा उलटफेर: शम्मी सिल्वा का इस्तीफा, सरकार के दबाव में हुआ प्रशासनिक बदलाव

Liam Mehta · · 1 min read

श्रीलंकाई क्रिकेट में बड़ा प्रशासनिक भूकंप: शम्मी सिल्वा और पूरी कमेटी ने छोड़ा पद

श्रीलंकाई क्रिकेट इस समय एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। मंगलवार को एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, शम्मी सिल्वा ने आधिकारिक तौर पर श्रीलंकाई क्रिकेट (SLC) के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे नेतृत्व का अंत है, क्योंकि सिल्वा के साथ-साथ कार्यकारी समिति के अन्य सदस्यों ने भी पद छोड़ने पर सहमति जताई है।

यह निर्णय एक विशेष कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान लिया गया, जो लगभग तीन घंटे तक चली। इस लंबी बैठक में बोर्ड के भविष्य और सरकार द्वारा डाले जा रहे दबाव पर गहन चर्चा हुई। इस सामूहिक इस्तीफे ने श्रीलंका क्रिकेट में एक पूर्ण नेतृत्व शून्य की स्थिति पैदा कर दी है, जो कि खेल के लिए एक अत्यंत नाजुक समय है।

सरकार का दबाव और कुप्रबंधन के गंभीर आरोप

शम्मी सिल्वा के इस्तीफे की पृष्ठभूमि में श्रीलंका की सरकार की सक्रिय भूमिका रही है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिशानायके ने क्रिकेट प्रशासन में एक नई शुरुआत की आवश्यकता पर जोर दिया था। दरअसल, पिछले काफी समय से जनता और खेल प्रेमियों के बीच SLC के भीतर कुप्रबंधन और पारदर्शिता की कमी को लेकर भारी आक्रोश था।

हफ्तों से बोर्ड के कामकाज और शासन प्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे थे। शम्मी सिल्वा को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था, और यह स्पष्ट हो गया था कि जब तक प्रशासनिक ढांचे में बदलाव नहीं किया जाता, तब तक खेल में सुधार संभव नहीं है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि बोर्ड को अब नई सोच और नए प्रशासन को नियंत्रण सौंपना होगा, जिसके परिणामस्वरूप सिल्वा को पीछे हटना पड़ा।

राजनीतिक हस्तक्षेप और ICC का कड़ा रुख

श्रीलंका क्रिकेट के लिए यह पहली बार नहीं है जब उसे प्रशासनिक अस्थिरता का सामना करना पड़ा हो। खेल इतिहास गवाह है कि श्रीलंका क्रिकेट अक्सर राजनीतिक खींचतान का शिकार रहा है। यहाँ तक कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 2023 में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण बोर्ड को निलंबित कर दिया था

यह इतिहास दर्शाता है कि शासन संबंधी समस्याएं गहरी हैं। वर्तमान स्थिति में, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नया प्रशासन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो। इस दिशा में, सरकार जय शाह के नेतृत्व वाली ICC के साथ निरंतर संपर्क में है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों का पालन करे और भविष्य में किसी अन्य निलंबन की स्थिति पैदा न हो।

मैदान पर खराब प्रदर्शन और आंतरिक कलह का प्रभाव

प्रशासनिक विफलताओं के साथ-साथ, श्रीलंकाई टीम का मैदान पर प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा है। हाल के टूर्नामेंटों में टीम का प्रदर्शन बेहद खराब रहा, जिसमें T20 वर्ल्ड कप 2026 से समय से पहले बाहर होना सबसे बड़ा झटका था। इस विफलता ने बोर्ड पर दबाव को और अधिक बढ़ा दिया था।

मैदान के बाहर भी स्थितियां तनावपूर्ण थीं। खिलाड़ियों और बोर्ड के बीच एनओसी (NOC) की मंजूरी और फिटनेस मानकों जैसे मुद्दों पर गहरे मतभेद थे। प्रशंसकों और क्रिकेट विशेषज्ञों ने अक्सर शम्मी सिल्वा के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे, क्योंकि ऐसा महसूस किया जा रहा था कि बोर्ड खिलाड़ियों की जरूरतों और टीम के प्रदर्शन के बीच संतुलन बनाने में विफल रहा है।

आगे की राह: क्या होगा नया प्रशासनिक ढांचा?

अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि शम्मी सिल्वा के जाने के बाद कमान किसके हाथ में आएगी। उम्मीद है कि इस्तीफे के पत्र बुधवार को खेल मंत्री सुनिल कुमारा गामागे को सौंप दिए जाएंगे, जो अगले चरण की रूपरेखा तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाएंगे।

सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने एक अंतरिम समिति या एक नए नेतृत्व समूह के गठन के संकेत दिए हैं। इस नई व्यवस्था का प्राथमिक उद्देश्य श्रीलंका क्रिकेट में व्यावसायिकता (Professionalism) और स्थिरता लाना होगा। सरकार का लक्ष्य एक ऐसी प्रणाली बनाना है जहाँ पारदर्शिता हो और खिलाड़ियों के लिए सख्त लेकिन निष्पक्ष नियम हों।

कुल मिलाकर, शम्मी सिल्वा का इस्तीफा श्रीलंका क्रिकेट के लिए एक ‘रीसेट बटन’ की तरह है। अब चुनौती यह है कि क्या नया प्रशासन पुराने घावों को भर पाएगा और श्रीलंकाई क्रिकेट को फिर से दुनिया के शीर्ष स्तर पर ले जा पाएगा। प्रशंसकों को उम्मीद है कि यह बदलाव केवल कागजों पर नहीं, बल्कि मैदान पर भी सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा।

Liam Mehta

Liam Mehta is the cricket correspondent for The Guardian, covering England’s men’s and women’s teams, the County Championship, and the global game with a special focus on South Asian cricket. Born in Leicester to a Punjabi father and a Welsh mother, Liam grew up straddling two cricketing cultures — the buzz of India‑Pakistan clashes at his local club and the village‑green rhythms of county weekends. After reading English at Oxford, he trained as a journalist at City, University of London, and began his career at Wisden, where his archival pieces on the late‑1970s Indian tours of England garnered wide praise. Today he writes match reports, long‑form features on diaspora identity, and columns that challenge cricket’s establishment. He is also the host of The Reverse Sweep, a Guardian podcast on cricket, culture, and the subcontinent’s hold on the summer game.