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ILT20 teams concerned over new rules mandating Afghanistan, Ireland player recru

Liam Mehta · · 1 min read

ILT20 के नए नियमों पर फ्रेंचाइजी और आयोजकों के बीच विवाद

दुबई की प्रमुख टी20 लीग, ILT20 के भविष्य को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में जारी किए गए 2026 प्लेयर कॉन्ट्रैक्ट मॉडल दस्तावेज़ के अनुसार, टूर्नामेंट के आयोजकों ने एक ऐसा नियम लागू किया है जो सभी छह फ्रेंचाइजी टीमों के लिए अनिवार्य है। इसके तहत, प्रत्येक टीम को अपने स्क्वाड में अफगानिस्तान से कम से कम चार और आयरलैंड से एक खिलाड़ी को शामिल करना होगा। इतना ही नहीं, प्लेइंग इलेवन में भी अफगानिस्तान से दो, यूएई से दो और एक एसोसिएट देश से खिलाड़ी रखना अनिवार्य कर दिया गया है।

फ्रेंचाइजी की चिंताएं और आपत्तियां

ILT20 teams concerned over new rules mandating Afghanistan, Ireland player recru के बाद से ही टूर्नामेंट की फ्रेंचाइजी टीमें काफी चिंतित हैं। इन टीमों का तर्क है कि इस तरह के कड़े नियमों से उनकी टीम चुनने की आजादी छिन गई है। एक अधिकारी के अनुसार, यदि आधी प्लेइंग इलेवन इन्ही देशों के खिलाड़ियों से भरी होगी, तो टीमें अपनी पसंद का सर्वश्रेष्ठ संयोजन (Best XI) नहीं बना पाएंगी। फ्रेंचाइजी का मानना है कि यदि वे अपनी मनपसंद टीम नहीं बना पाए, तो इससे टीम का प्रदर्शन प्रभावित होगा और वित्तीय नुकसान भी झेलना पड़ सकता है।

क्यों लागू किए गए ये नियम?

लीग प्रबंधन का मानना है कि खिलाड़ियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह एक आवश्यक कदम था। पिछले कुछ वर्षों में, SA20 और बिग बैश लीग (BBL) जैसे अन्य टूर्नामेंटों के साथ तारीखों के टकराव के कारण खिलाड़ियों की कमी देखी गई है। इसके अलावा, कई क्रिकेट बोर्डों ने अपने खिलाड़ियों को विभिन्न टी20 लीगों में खेलने पर सीमाएं लगा दी हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) भी लगातार बढ़ रही टी20 लीगों के प्रभाव को लेकर चिंतित है, और ऐसे में ILT20 अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए अफगानिस्तान और आयरलैंड के साथ विशेष समझौते कर रहा है ताकि एक निश्चित खिलाड़ी पूल बना रहे।

वित्तीय और रणनीतिक चुनौतियां

फ्रेंचाइजी का एक बड़ा मुद्दा बजट से भी जुड़ा है। उनका कहना है कि यदि वे इन अनिवार्य नियमों के तहत खिलाड़ियों को अनुबंधित करते हैं और फिर वे खिलाड़ी उपलब्ध नहीं होते हैं, तो यह सीधे तौर पर उनके बजट पर असर डालेगा। फ्रेंचाइजी अधिकारियों का यह भी मानना है कि इन नियमों को लागू करने से पहले उनसे परामर्श नहीं किया गया, जो कि एक पेशेवर लीग के लिए बेहद जरूरी था।

भविष्य के लिए एक मिसाल?

यह पहला मौका नहीं है जब ILT20 ने बोर्डों के साथ समझौते किए हैं। इससे पहले, उद्घाटन सत्र 2022 से पहले भी क्रिकेट वेस्ट इंडीज के साथ ऐसा समझौता किया गया था, लेकिन उसमें खिलाड़ियों की संख्या को लेकर कोई शर्त नहीं थी। अब देखना यह है कि क्या लीग प्रबंधन इन सख्त नियमों पर कायम रहता है या फिर फ्रेंचाइजी के दबाव में इसमें कुछ ढील दी जाती है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि वैश्विक क्रिकेट बाजार में प्रतिभाओं को सुरक्षित करने की होड़ कितनी तीव्र हो चुकी है और इसके लिए टूर्नामेंट को किस हद तक कठोर कदम उठाने पड़ रहे हैं।

अंत में, खेल प्रेमियों और विश्लेषकों की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह नया ढांचा ILT20 को एक मजबूत लीग बनाने में मदद करेगा या फिर यह फ्रेंचाइजी और आयोजकों के बीच के दरार को और गहरा कर देगा। आने वाले समय में, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य लीग भी इसी तरह के नियमों को अपनाती हैं या फिर खिलाड़ियों की आजादी को प्राथमिकता दी जाएगी।

Liam Mehta

Liam Mehta is the cricket correspondent for The Guardian, covering England’s men’s and women’s teams, the County Championship, and the global game with a special focus on South Asian cricket. Born in Leicester to a Punjabi father and a Welsh mother, Liam grew up straddling two cricketing cultures — the buzz of India‑Pakistan clashes at his local club and the village‑green rhythms of county weekends. After reading English at Oxford, he trained as a journalist at City, University of London, and began his career at Wisden, where his archival pieces on the late‑1970s Indian tours of England garnered wide praise. Today he writes match reports, long‑form features on diaspora identity, and columns that challenge cricket’s establishment. He is also the host of The Reverse Sweep, a Guardian podcast on cricket, culture, and the subcontinent’s hold on the summer game.